अंकित एक बात ही गरीब इंसान था ऊपर से उसके परिवार की जिम्मेदारी उसके ऊपर थी इसीलिए वह गांव के बाहर एक फैक्ट्री में मजदूरी का काम किया करता था जिससे उसके घर का गुजारा चल जाता था पर ताकि वह कुछ पैसा भविष्य के लिए भी बचा सके इसके लिए वह देर रात तक अलग से काम किया करता था जिसकी वजह से वह रोज देर रात को ही घर वापस जाता था ऐसे ही आज रात भी वह देर रात को अपने घर वापस जा रहा था और रात के करीब 11:30 बज रहे होंगे और अंकित एक सुनसान वीरान रास्ते पर अकेला चला जा रहा था दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था और रात भी अमावस की काली रात थी अंकित ने काफी कुछ सुन रखा था इस भयानक रात के बारे में इसलिए उसे बहुत डर लग रहा था लेकिन फिर भी वह हिम्मत करके आगे बढ़ता जा रहा था क्योंकि किसी भी हाल में उसे घर पहुंचना ही था रोज तो वह ऑटो से घर चला जाया करता था लेकिन आज तो उसे कोई ऑटो भी नहीं मिला था इसलिए वह पैदल ही उस सुनसान रास्ते पर चल रहा था थोड़ी दूर चलने पर अंकित को ऐसा लगा कि कोई उसका पीछा कर रहा है।
अपना शक दूर करने के लिए अंकित ने पीछे मुड़कर देखा तो वहां पर कोई नहीं था अंकित ने सोचा शायद यह उसका वहम है और वह आगे बढ़ गया थोड़ी देर बाद उसको अपने पीछे से घुंघरू की आवाज सुनाई दी अंकित बहुत बुरी तरह डर गया जैसे तैसे हिम्मत करके उसने पीछे देखा तो एक बहुत ही गरीब और लाचार औरत उसके पीछे चल रही थी उसने बहुत ही लंबा लहंगा पहन रखा था जिसके कारण उसके पैर नहीं दिख रहे थे पर उसके चेहरे से मानो उसकी मजबूरी और लाचारी साफ पता चल रही थी अंकित ने उस औरत से पूछा कि आप कौन हो और इतनी रात यहां क्या कर रही हो तब औरत ने कहा कि मैं भी तुम्हारे ही तरह देर रात काम पर से वापस घर लौट रही हूं अंकित ने बहुत हैरान होकर पूछा की क्या तुम्हारे घर में कोई और कमाने वाला नहीं है जो तुम इतनी मेहनत कर रही हो इतना सुनकर वह औरत जोर-जोर से रोने लगी आवाज इतनी जोर की थी कि आसपास के इलाके में सिर्फ उसकी रोने की आवाज ही गूंज रही थी फिर अंकित ने कहा रो मत कुछ परेशानी है तो मुझे बताओ यह सुन उस औरत ने कहा मैं अगर तुम्हें अपनी परेशानी बताऊंगी तो क्या तुम मेरी परेशानी दूर कर पाओगे अंकित ने कहा अगर दूर कर सकता हूं तो कर पाऊंगा नहीं तो आपके लिए दुआ करूंगा औरत ने कहा ठीक है तो मेरे साथ मेरे घर चलो वहां तुम सब समझ जाओगे मेरी परेशानी मेरी लाचारी सब कुछ समझ जाओगे अंकित ने कहा अभी रात बहुत हो चुकी है मुझे अपने घर भी जाना है मैं आपके घर नहीं चल सकता।
औरत ने कहा ठीक है कोई बात नहीं मैं अपनी परेशानी खुद ही दूर कर लूंगी अंकित ने कहा मैं आपके घर भले ही नहीं जा सकता पर आप अगर चाहे तो मुझे अपनी परेशानी बता सकती हैं मैं कोशिश करूंगा आपकी परेशानी दूर करने की इस पर उस औरत ने कहा ठीक है आगे जाकर दो रास्ते आएंगे तुम अपने घर की तरफ ना जाकर मेरे साथ दूसरे रास्ते पर मेरे साथ चलना बस थोड़ी ही दूर चलना पड़ेगा फिर तुम सब समझ जाओगे उसके बाद तुम अपने घर जा सकते हो अंकित ने सोचा ठीक है इतनी अंधेरी रात में एक लाचार महिला अगर मुझसे मदद चाहती है तो कोई बात नहीं मैं उसकी मदद कर देता हूं पर पता नहीं ऐसी क्या परेशानी है जो वह मुंह से नहीं बताना चाह रही बस दिखाना चाहती है इतना सोचने के बाद अंकित ने कहा ठीक है कोई बात नहीं मैं पहले तुम्हारे साथ जाऊंगा फिर मैं अपने घर चला जाऊंगा थोड़ी दूर चलने के बाद वह मोड भी आ गया जहां से दो रास्ते जाते थे पर रहते हैं ना की प्रकृति का भी एक नियम है चाहे कोई भी अपना कितना ही रूप बदल ले लेकिन रात के 12:00 उसे अपने असली रूप में हर हाल में आना पड़ता है यही उसे औरत के साथ भी हुआ अंकित तो मदद करने की इच्छा से उस औरत के पीछे उसके बताएं रास्ते पर चल रहा था पर अब रात के 12:00 बज चुके थे और वह औरत अपने असली रूप में आने को मजबूर हो गई थी।
अंकित के आंखों के सामने वह एक गरीब सी लाचार सी परेशान सी औरत एक भयानक खौफनाक आत्मा में बदल चुकी थी वह पीछे से ही बहुत भयानक दिख रही थी तो उसका चेहरा कितना भयानक होगा अंकित जो पहले से ही बहुत डरा हुआ था यह सब देखकर और भी ज्यादा डर गया अब अंकित कैसे भी करके वहां से बचकर निकलना चाहता था जैसे ही वह उस रास्ते से वापस अपने घर की और जाने के लिए वापस मुड़ा वैसे ही उसे जोर-जोर से हंसने की आवाज आने लगी आवाज बिल्कुल पहले जैसी थी फिर अचानक से वह भयानक आत्मा उसके सामने आ गई अचानक सामने आने की वजह से अंकित ने आत्मा का चेहरा देख लिया था उस आत्मा का चेहरा आधा जला हुआ था और उसकी एक आंख से खून बह रहा था उसकी आंखें बिल्कुल सफेद और भयानक थी और उसके पूरे शरीर में से जगह-जगह से खून टपक रहा था यह सब मंजर देखकर अंकित तो बिल्कुल बेसुध सा हो गया अब उसे लगा कि अब वह जिंदा नहीं रह पाएगा पर उस आत्मा ने अंकित से एक ऐसी बात बोल दी जैसे सुनकर अंकित को बहुत आश्चर्य हुआ एक पल को मानो वह अपना सारा डर भूल गया हो।
तभी अचानक वह आत्मा फिर से वही गरीब के शहर लाचार औरत के रूप में आ जाती है और कहती है कि तुमने मुझे पहचान ही नहीं कि मैं कौन हूं मैं रोज तुम्हारे साथ रहती हूं तुम्हारा सब काम करती हूं उसके बाद भी तुमने मुझे पहचाना नहीं इस पर अंकित बोल पहेलियां ना बुझाओ साफ-साफ बताओ तुम हो कौन फिर वह आत्मा बोली कि मैं तुम्हारी पत्नी की आत्मा हूं यह सुनते ही अंकित हैरान रह गया और बोला ऐसा कैसे हो सकता है मेरी पत्नी तो घर पर है जिंदा है सही सलामत है तो तुम उसकी आत्मा कैसे हो सकती हो इस पर उस आत्मा ने कहा ठीक है आज मैं तुमसे पहले तुम्हारे घर नहीं जाती आज मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे घर जाती हूं फिर देखते हैं कि वहां तुम्हें तुम्हारी पत्नी मिलती है या नहीं अंकित बहुत ज्यादा डर गया था क्योंकि एक आत्मा का रूप इतना भयानक देखने के बाद फिर उसे पर विश्वास करना बहुत कठिन हो रहा था अंकित के लिए अंकित की ऐसी हालत देखकर उस आत्मा ने कहा ठीक है मैं तुम्हें वचन देता हूं कि मैं तुम्हें कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी पर मैं अपनी सच्चाई भी तुम्हें बात कर ही रहूंगी।
अंकित ने कहा ठीक है अगर आज मेरे नसीब में मेरी मौत तुम्हारे हाथों ही लिखी है तो उसे कौन टाल सकता है अंकित ने कहा पर तुम मुझसे आगे चलना जिससे मुझे तुमसे डर थोड़ा कम लगेगा और अगर तुम मेरी पत्नी की आत्मा हो तो तुम्हें मेरे घर का रास्ता तो पता ही होगा मुझे बताने की क्या जरूरत है आत्मा ने कहा ठीक है अब आगे आगे आत्मा चल रही थी और अंकित उस आत्मा के पीछे-पीछे चल रहा था एक घंटा चलने के बाद अंकित का घर आ गया फिर अंकित ने अपनी पत्नी को आवाज़ लगाई पर घर में उसकी पत्नी थी ही नहीं तो उसकी आवाज कैसे सुनती उसकी बुद्धि मां निकल कर आई और बोली अपनी पत्नी को आवाज मत लगा वह किसी काम से बाहर की तरफ गई थी मैंने बहुत पूछा इतनी रात कहां जा रही है पर उसने मुझे कोई जवाब ना दिया बस इतना कह कर गई है कि बहुत जरूरी काम है बच्चों का मैं खूब ख्याल रखूं और जल्दी ही वह वापस आ जाएगी यह सब सुनकर वह आत्मा बोली हां मांजी मैं वापस आ गई।
अंकित की मां बोली अंकित बेटा यह आज तो किसी औरत को अपने साथ लेकर आया है कौन है यह अंकित ने कहा माझी यह एक आत्मा है और यह अपने आप को मेरी पत्नी बता रही है यह सब सुनकर अंकित की मां भी बहुत डर गई क्योंकि अंकित के घरों में उसके कमरे में बच्चे भी सो रहे थे तरह-तरह के ख्याल अंकित की मां के मन में आने लगे अंकित की मां ने कहा इस पर भरोसा मत कर अभी इस पूरी बस्ती में सिर्फ हम दोनों ही जाग रहे हैं और यह तो आत्मा है कुछ भी कर सकती है तो आसपास के बस्ती वालों को जगह और तब इससे पूछ कि यह है कौन और अपने आप को तेरी पत्नी क्यों बोल रही है अंकित ने ऐसा ही किया अंकित के दो-तीन बार आवाज देने पर आसपास के बस्ती वाले लोग जाग जाकर बाहर निकलने लगे और कहने लगे क्या हुआ अंकित भाई क्यों चिल्ला रहे हो रात में।
तब अंकित ने कहा तुम सब ने मेरी पत्नी को देखा है ना वह कैसी दिखती है कैसी रहती है सब ने कहा इसमें कौन सी बड़ी बात है अंकित ने कहा बात है इसलिए तो तुम्हें इतनी रात को जगाया है यह देखो इसकी शक्ल क्या मेरी पत्नी से मिलती है यह एक आत्मा है और यह अपने आप को मेरी पत्नी बता रही है आत्मा नाम सुनते ही सब घबरा गए पर इस पर आत्मा ने कहा तुम सब घबराओ मत मैं तुम सबको कोई भी नुकसान नहीं पहुंचाऊंगी बस मुझे इंसाफ चाहिए मुझे शांति चाहिए मुझे मुक्ति दिला दो मैं इस संसार से हमेशा के लिए चली जाऊंगी फिर अंकित ने कहा कि हम तुम्हारी बातों का कैसे विश्वास करें कि तुम ही मेरी पत्नी हो इस पर उसे आत्मा ने कहा कि यह बताओ तुम्हारी पत्नी देर रात कहीं बाहर गई थी और अभी तक नहीं आई है बता सकते हो कि वह कहां गई है इस पर अंकित ने कहा नहीं अभी तक नहीं आई है इस बात की चिंता मुझे भी है पर अगर मैं तुम्हें यहां छोड़कर उसे ढूंढने जाऊंगा तो कहीं तुम मेरी मां मेरे बच्चों को कोई नुकसान न पहुंचा दो इसीलिए मैं तुम पर निगरानी रखने के लिए तुम्हारे साथ हूं फिर उसे आत्मा ने अपने हाथ में से एक अंगूठी निकाली और अंकित के पैरों के पास रख दी अंकित ने वह अंगूठी उठाई और अपनी मां को दिखाई अंकित और अंकित की मां की आंखें अब आंसुओं से भर चुकी थी क्योंकि यह अंगूठी वही अंगूठी थी जिसको अंकित पहली बार अपनी तनख्वाह में से कुछ हिस्सा बचाकर पैसे जोड़कर अपनी पत्नी के लिए लेकर आया था अंकित की मां ने कहा बेटा यह सच बोल रही है यही तुम्हारी पत्नी है फिर अंकित की मां ने कहा पर बेटी एक बात बताओ कल तक तो तुम सही सलामत थी और आज एक आत्मा कैसे बन गई इस पर उसे आत्मा ने कहा मैं कल सही सलामत नहीं थी मैं कल भी आत्मा के ही रूप में आप लोगों के साथ थी 2 साल पहले मैं जंगल में लड़कियां काटने के लिए गई थी तभी कुछ लुटेरों ने मुझे लूटने छह उन्हें मेरे पास कोई भी कहना ना मिला तो उन्होंने सोचा क्यों ना मेरी इज्जत ही लूट ली जाए लेकिन मैं भी अपनी इज्जत पर उन्हें जरा भी हाथ नहीं डालने दिया मेरे हाथ में उसे वक्त जो औजार था जिससे मैं लड़कियां काटने वाली थी उससे मैंने तब लड़कियां नहीं काटी बल्कि उन लोगों के शरीर पर जगह-जगह हमला किया था मैं वहां से बचकर भागने में भी कामयाब हो गई थी पर उनमें से एक आदमी जो छिपा हुआ था वह अचानक निकलकर आया और मेरे सामने खड़ा हो गया मैं उसके भी हाथ पर वार किया पर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और मेरे साथ जबरदस्ती करने लगा फिर मैं जैसे तैसे करके अपने आप को उसे बचाया और फिर भागने लगे फिर उसने मुझे पड़ा और मेरा गला घोट कर मुझे जान से मार दिया और मेरे ही औजार से मेरे चेहरे का बुरा हाल कर दिया मैं मर चुकी थी मेरे शरीर से मेरी आत्मा अलग हो चुकी थी उसके बाद में मैंने देखा कि वह आदमी आधे घंटे बाद वापस आया और अबकी बार वह अपने साथ मिट्टी का तेल लेकर आया था और मेरी लाश पर डालकर उसे जलने लगा जब मेरी लाश जलने लगे तभी वहां से एक संत गुजर रहे थे उन्होंने जब कुछ दूर से मेरा शरीर जलता हुआ देखा तो वह मेरे शरीर की और आने लगे उन्हें अपनी और आता देखकर वह आदमी मुझे वहीं छोड़कर भाग गया उन संत को लगा कि मुझे किसी ने जिंदा ही जलन की कोशिश की है मतलब मैं बेहोशी की हालत में जल रही हूं इसीलिए उन्होंने मुझे बचाने के लिए मुझ पर अपने पास रखा हुआ जल डाल मुझ पर मिट्टी डाली जिससे मेरे शरीर की जलती हुई अग्निशांत हुई पर जब अग्निशन तो हो चुके थे उसके बाद उन्होंने देखा कि मैं बेहोश नहीं थी मैं तो पहले ही मर चुकी थी इस पर उन्हें बहुत दुख हुआ फिर उन्होंने आसपास देखा तो बहुत जगह उन्हें खून पड़ा दिखाई दिया और मेरा औजार भी खून से सारनाथ है उन्हें दिखाई दिया तब उन्हें लगा कि जरूर इसके साथ में कुछ गलत काम हुआ है उन्होंने अपनी विद्या से मेरी आत्मा को अपने सामने प्रकट किया और मुझे मेरा सारा हाल पूछा फिर उन्होंने कहा तेरे साथ में जो हुआ बहुत गलत हुआ है चल ठीक है अब मैं तुझे मुक्ति देता हूं तू परलो के बिना किसी कष्ट के जाएगी इस पर मैंने कहा हे महान आत्मा मुझे अभी मुक्ति नहीं चाहिए मेरे घर पर मेरे भूखे बच्चे मेरी बुद्धि मन और मेरे गरीब पति मेरा इंतजार कर रहे हैं मैं अचानक उनके पास इस रूप में भी नहीं जा सकती मुझे कुछ समय के लिए एक शरीर रूपी आत्मा बना दो जिसका चेहरा बिल्कुल मेरे चेहरे की तरह हो और आवाज भी बिल्कुल मेरी आवाज की तरह हो उन संत ने ऐसा ही किया मुझे आत्मा से कुछ समय के लिए एक शरीर बना दिया जो बिल्कुल तुम्हारी पत्नी जैसा दिखता था लेकिन आज रात अमावस्या की रात थी और उन संत ने कहा था कि आज की रात तेरी आखिरी रात होगी कल का सूरज निकलते ही तू खुदवा खुद पर परलोक चली जाएगी मैं इस लोक से पर लोग चली जाऊं उससे पहले मैं तुम सबको अपनी सच्चाई बताना चाहती थी ताकि मैं अगर पढ़ लोग चले जाऊं तो तुम मुझे इस संसार में ना ढूंढो और मेरी सच्चाई जान सको और मेरे लिए तर्पण कर सको मेरे लिए प्रार्थना कर सको यह सब बात सुनकर जितने भी लोग वहां मौजूद थे सब की आंखों में आंसू आ गए और सभी लोग अंकित की पत्नी के साथ में जो कुछ हुआ वह सब सुनकर बहुत दुखी थे क्योंकि वह बहुत ही अच्छी स्वभाव की महिला थी जो हमेशा सबकी मदद किया करती थी लेकिन जब उसे मदद की जरूरत पड़ी थी तब उसके पास कोई भी ना था उसकी मदद के लिए अंकित ने कहा ठीक है अगर तुम मेरी पत्नी हो तो मैं तुम्हारी आत्मा को भी स्वीकार करता हूं और भगवान से सच्चे दिल से प्रार्थना करता हूं कि अब तो मैं और कष्ट ना दे और तुम्हें परलोक में स्थान दे दे और जिन लोगों ने भी तुम्हारे साथ इतना दूर व्यवहार किया है उन्हें भगवान कड़ी से कड़ी सजा दे जब अंकित ने ऐसा बोला तब अंकित की पत्नी की आत्मा ने कहा उन सब लुटेरो को कि जैसा हाल उन्होंने मेरा किया वैसा हल वह किसी और का करें इसलिए मैंने उन्हें ढूंढ ढूंढ कर जान से मार दिया इतना कहकर वह आत्मा जिस रास्ते अंकित के साथ आई थी उसी रास्ते वापस चली गई और इस जंगल में चली गई जहां पर उसके साथ दुष्कर्म हुआ था अब अंकित की बस्ती के सारे लोग भी अपनी-अपनी बस्तियों में चले गए पर उन्हें अंकित की पत्नी के साथ जो भी कुछ हुआ इस बात का बहुत ही दुख था अब अंकित की मां ने भी अंकित को घर में बुलाया और अंकित को समझाते हुए कहा बेटा भगवान को जब मंजूर होता है वही होता है भगवान की आगे किसी की नहीं चलती अब तुझे ही अपने बच्चों को अकेले पालना है और मुझे भी तुझे ही संभालना है इसलिए तू अब मजबूत बन और हम सब का सहारा बन इस पर अंकित ने कहा मां तुम सच कहती हो शायद मेरे भाग्य में यही सब लिखा था और मेरी पत्नी के भाग्य में इतना कष्ट लिखा था जितना उसने भोग लिया अब कल सुबह का सूरज निकलते ही वह भी इस संसार से मुक्त हो जाएगी अब मुझे भी उसका मुंह छोड़कर अपने परिवार की ओर ध्यान देना चाहिए।
मां आज की इतनी भयानक और खौफनाक रात मुझे हमेशा याद रहेगी इतनी भयानक और खौफनाक रात भगवान किसी के जीवन में भी ना आने दे और जैसा मेरी पत्नी के साथ हुआ किसी के भी साथ ऐसा ना हो यही मेरी भगवान से प्रार्थना है कुछ घंटे बाद ही सुबह का सूरज निकल आया अंकित की पत्नी की आत्मा को इस संसार से मुक्ति मिल चुकी थी उधर अंकित ने भी पंडित को बुलवाया अपनी पत्नी के बारे में सारा हर बुलाया बस्ती के लोगों को भी पंडित जी से मिलवाया और अपनी पत्नी की आत्मा की शांति के लिए पूजा पाठ कराया और अपने बच्चों की अपनी मां की पूरी जिम्मेदारी अकेले संभालने का प्रण लिया।
धन्यवाद
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अधूरी मोहब्बत की दर्द भरी दास्तां
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